Novel
Panchshool- Ek Divya Astra
पंचशूल – एक दिव्य अस्त्र
थिक्कारा नाम के एक छोटे-से गाँव में एक ऐसा दिव्य अस्त्र छिपा है, जिसे पाने की चाहत सदियों से शक्ति और अमरत्व के भूखे लोगों को रही है।
पंचशूल—पाँच शूलों और पाँच दिव्य मणियों से बना यह अस्त्र पंचदेवियों की शक्ति से युक्त है और पृथ्वी के पाँच तत्वों—अग्नि, जल, वायु, धरती और आकाश—को नियंत्रित करने की क्षमता रखता है। लेकिन इसे केवल वही धारण कर सकता है जिसका मन, आत्मा और चरित्र पूरी तरह पवित्र हो।
समर्थ, एक युवा, बुद्धिमान और आध्यात्मिक व्यक्ति, अपने पिता द्वारा बचपन से ही एक महान उद्देश्य के लिए तैयार किया गया है। वह हिंसा से दूर रहकर धर्म, ज्ञान और साधना के मार्ग पर चलता है। दूसरी ओर है सर्वेश्वरा—एक निर्दयी और अहंकारी राजा, जो अमर होकर तीनों लोकों पर शासन करना चाहता है। पंचशूल उसकी सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा है।
जब सर्वेश्वरा को पता चलता है कि पंचशूल का वास्तविक रक्षक समर्थ है, तो वह उसे पाने के लिए थिक्कारा पर कहर बरपाता है। अपने गाँव और परिवार को बचाने के लिए समर्थ को अंततः पंचशूल धारण करना पड़ता है। इसके बाद शुरू होता है धर्म और अधर्म, कर्तव्य और प्रेम तथा शक्ति और त्याग के बीच एक ऐसा युद्ध, जो केवल दो योद्धाओं का नहीं, बल्कि पूरी सृष्टि के भविष्य का निर्णय करेगा।